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3 डीआरएस चरणों की तुलना: सही फैसला
विशेष विश्लेषण

3 डीआरएस चरणों की तुलना: सही फैसला

क्रिकेट में डीआरएस केवल तीसरे अंपायर को बुलाने का तरीका नहीं, बल्कि मैदानी निर्णय की तकनीकी दोबारा जांच है। निर्णय समीक्षा प्रणाली में बल्लेबाज, कप्तान और मैदानी अंपायर की भूमिका जुड़ी होती है, जबकि ह...

17 अक्टूबर 2026 5 min read
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3 डीआरएस चरणों की तुलना: सही फैसला

क्रिकेट में डीआरएस केवल तीसरे अंपायर को बुलाने का तरीका नहीं, बल्कि मैदानी निर्णय की तकनीकी दोबारा जांच है। निर्णय समीक्षा प्रणाली में बल्लेबाज, कप्तान और मैदानी अंपायर की भूमिका जुड़ी होती है, जबकि हॉक-आई, अल्ट्राएज और हॉट स्पॉट अलग-अलग सवालों के उत्तर देते हैं। भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बाजारों में इसका उपयोग आईसीसी की खेल शर्तों के अनुसार होता है। आम तौर पर खिलाड़ी को समीक्षा मांगने के लिए लगभग 15 सेकंड मिलते हैं, लेकिन समीक्षा की संख्या प्रारूप और प्रतियोगिता पर निर्भर करती है; टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में यह प्रायः प्रति पारी दो होती है, जबकि ट्वेंटी20 में संख्या अलग हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गेंद की दिशा, बल्ले का किनारा और एल्बीडब्ल्यू की तीन शर्तें अलग-अलग जांचें। डीआरएस देखते समय पहले मूल फैसला, फिर उपलब्ध तकनीकी प्रमाण और अंत में अंपायर कॉल पर ध्यान दें।

Cricket third umpire reviewing DRS footage in a modern broadcast control room during an international match

डीआरएस को लेकर सबसे आम गलतफहमी यह है कि तकनीक हर बार मैदानी अंपायर का फैसला बदल देती है। ऐसा नहीं है। तकनीक प्रमाण देती है, लेकिन समीक्षा अधिकारी को आईसीसी की प्रक्रिया और उपलब्ध दृश्य-ध्वनि प्रमाण के आधार पर निर्णय लेना होता है। आईपीएल समाचार पर मैच समीक्षा पढ़ते समय केवल “रिव्यू सफल” या “रिव्यू असफल” देखना अधूरा है; यह देखना भी जरूरी है कि निर्णय बल्ले के किनारे, गेंद के पैड से टकराने या स्टंप पर अनुमानित प्रभाव के कारण बदला। आईसीसी के निर्णय समीक्षा प्रणाली नियम में प्रक्रिया, समय-सीमा और समीक्षा के उपयोग की बुनियादी रूपरेखा दी गई है। नियम प्रतियोगिता के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए किसी खास मैच का अंतिम संदर्भ उसकी आधिकारिक खेल शर्तें होती हैं। आसान भाषा में कहें तो डीआरएस गलती सुधारने का साधन है, अंपायर की जगह लेने वाली मशीन नहीं।

इस विषय को मैच के आँकड़ों से जोड़कर समझना हो तो क्रिकेट मैच समीक्षा और निर्णय विश्लेषण पढ़ें।

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चरण 1: समीक्षा की मांग कैसे करें?

समीक्षा मांगने की शुरुआत खिलाड़ी या कप्तान के स्पष्ट संकेत से होती है। आउट दिए गए बल्लेबाज की समीक्षा बल्लेबाज मांग सकता है, जबकि नॉट आउट निर्णय को चुनौती देने के लिए क्षेत्ररक्षण कप्तान संकेत देता है। “टी” संकेत आम तौर पर लगभग 15 सेकंड की सीमा के भीतर होना चाहिए, और मैदानी अंपायर यह सुनिश्चित करता है कि अनुरोध समय पर तथा सही पक्ष से आया है। यह प्रक्रिया गेंद के तुरंत बाद शुरू होती है, इसलिए बल्लेबाजों को रन लेने, बातचीत करने और संकेत देने में समय नहीं गंवाना चाहिए। टीवी अंपायर के पास भेजे जाने के बाद समीक्षा को मनमाने ढंग से वापस नहीं लिया जा सकता, हालांकि तकनीकी जांच से पहले प्रक्रिया संबंधी स्पष्टता ली जा सकती है।

समय-सीमा में किन बातों का ध्यान रखें?

पहला नियम है कि अपील और निर्णय को ठीक से समझें। यदि गेंद बल्ले से लगकर कैच हुई है, तो बल्लेबाज को तुरंत संकेत देना चाहिए; यदि एल्बीडब्ल्यू का फैसला आया है, तो नॉन-स्ट्राइकर और कप्तान को गेंद की लाइन तथा प्रभाव का अंदाजा लगाना होगा। रिव्यू लेने का निर्णय भावनात्मक प्रतिक्रिया पर नहीं, उपलब्ध संकेतों पर आधारित होना चाहिए। निम्न क्रम उपयोगी रहता है:

  1. मैदानी अंपायर का मूल निर्णय सुनें।
  2. कप्तान, विकेटकीपर और गेंदबाज से संक्षिप्त जानकारी लें।
  3. लगभग 15 सेकंड के भीतर दोनों हाथों से “टी” संकेत दें।
  4. टीवी अंपायर की जांच में पहले घटना का सही बिंदु तय होने दें।
  5. अंतिम निर्णय के बाद बचे हुए रिव्यू और स्कोर की पुष्टि करें।

आईसीसी की प्रक्रिया में “स्पष्ट और निर्णायक प्रमाण” का विचार महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर धुंधले फ्रेम से फैसला बदलेगा। उदाहरण के लिए, अल्ट्राएज में आवाज गेंद के बल्ले के पास आने पर दिख सकती है, पर आवाज का स्रोत बल्ला, पैड या जमीन भी हो सकता है। इसलिए तकनीक को घटनाक्रम के साथ पढ़ना पड़ता है। आईपीएल समाचार की मैच रिपोर्ट में समीक्षा का कारण लिखते समय “किनारा था” कहना पर्याप्त नहीं; यह भी बताना चाहिए कि ध्वनि गेंद के बल्ले तक पहुंचने के समय आई या बाद में।

चरण 2: क्या अल्ट्राएज और हॉट स्पॉट अलग काम करते हैं?

अल्ट्राएज ध्वनि और तरंग-आधारित संकेत से संभावित बल्ले के किनारे की जांच करता है, जबकि हॉट स्पॉट गेंद के संपर्क से पैदा हुई ऊष्मीय छाप को दिखाने का प्रयास करता है। दोनों तकनीकें एक ही सवाल—गेंद ने बल्ले को छुआ या नहीं—पर अलग प्रकार का प्रमाण देती हैं। अल्ट्राएज में समय-संबंधी ध्वनि महत्वपूर्ण होती है, हॉट स्पॉट में संपर्क-स्थान और दृश्य निशान।

गेंद और बल्ले के बीच बहुत हल्का संपर्क हो तो सामान्य कैमरा उसे साफ नहीं पकड़ पाता। इसी कारण टीवी अंपायर पहले सामान्य रिप्ले, फिर धीमी गति और उसके बाद उपलब्ध तकनीकी दृश्य देखता है। अल्ट्राएज में गेंद के बल्ले के पास पहुंचते समय तीखी लहर दिखे तो वह उपयोगी संकेत है, लेकिन केवल लहर देखकर निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं। माइक्रोफोन में बल्ले का जमीन पर लगना, पैड से टकराव या विकेटकीपर के दस्ताने की आवाज भी आ सकती है। हॉट स्पॉट संपर्क की जगह दिखा सकता है, मगर कम तापमान, बल्ले की सतह, गेंद की गति और उपकरण की गुणवत्ता परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

हॉक-आई और स्पोर्ट्स डेटा कंपनियां अलग-अलग प्रसारण व्यवस्थाओं में इस्तेमाल हो सकती हैं; इसलिए हर प्रतियोगिता में स्क्रीन, संकेत और उपलब्ध कोण एक जैसे नहीं होते। हॉक-आई की आधिकारिक तकनीकी जानकारी गेंद-ट्रैकिंग और खेल निर्णय तकनीक के उपयोग का व्यापक संदर्भ देती है। याद रखें, अल्ट्राएज कैच और बल्ले के किनारे के लिए अधिक उपयोगी है, जबकि हॉट स्पॉट संपर्क का दृश्य संकेत दे सकता है। यही फर्क दर्शक अक्सर छोड़ देते हैं और फिर गलत निष्कर्ष निकालते हैं।

UltraEdge sound graph and Hot Spot replay displayed beside a cricket pitch during a tense review

डीआरएस तकनीकों की तुलना को और व्यवस्थित रूप में समझने के लिए अल्ट्राएज, हॉट स्पॉट और हॉक-आई का अंतर देखें।

अब तकनीकी संकेतों की तुलना साफ रूप में देखिए।

विस्तृत जानकारी देखें

  • अल्ट्राएज: गेंद के पास बल्ले या पैड से जुड़ी ध्वनि का समय दिखाता है।
  • हॉट स्पॉट: संपर्क की संभावित जगह पर ऊष्मीय निशान दिखाने की कोशिश करता है।
  • सामान्य रिप्ले: बल्ले का कोण, पैड की स्थिति और कैच की वैधता समझने में मदद करता है।
  • हॉक-आई: गेंद की उड़ान और स्टंप तक अनुमानित मार्ग का मॉडल बनाता है।

चरण 3: एल्बीडब्ल्यू में डीआरएस कैसे फैसला करता है?

एल्बीडब्ल्यू समीक्षा में निर्णय तीन मुख्य सवालों से बनता है: गेंद कहां पिच हुई, पैड से टकराते समय गेंद कहां लगी और अनुमानित मार्ग स्टंप से टकराता या नहीं। हॉक-आई गेंद के पिछले मार्ग और आगे के प्रक्षेपण से यह मॉडल तैयार करता है। यदि इनमें से किसी शर्त पर स्पष्ट प्रमाण मूल निर्णय को नहीं बदलता, तो मैदानी अंपायर का फैसला कायम रहता है।

एल्बीडब्ल्यू की तीन जांच

  1. पिचिंग: गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच हुई या नहीं। गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच होने पर सामान्य एल्बीडब्ल्यू दावा असफल हो सकता है, हालांकि बल्लेबाज शॉट खेलने की स्थिति में था या नहीं, यह नियम-संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
  2. इम्पैक्ट: गेंद पैड या शरीर के किस हिस्से से टकराई। यह बिंदु स्टंप की ऊंचाई, बल्लेबाज की स्थिति और गेंद की लाइन से जुड़ा है।
  3. विकेट: गेंद आगे बढ़ने पर स्टंप से टकराती या नहीं। यहां हॉक-आई का अनुमानित प्रक्षेपण निर्णायक प्रमाण के रूप में देखा जाता है।

सबसे अधिक भ्रम “अंपायर कॉल” को लेकर होता है। यदि तकनीकी अनुमान सीमा के बहुत करीब है, तो मैदान का मूल निर्णय बरकरार रह सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि तकनीक ने बल्लेबाज या गेंदबाज को स्वतः जीत दे दी; इसका अर्थ है कि उपलब्ध प्रमाण मूल निर्णय को पलटने के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं था। यह व्यवस्था तकनीक और मैदानी निर्णय के बीच संतुलन रखती है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट नियम में एल्बीडब्ल्यू कानून का आधिकारिक संदर्भ मिलता है, जबकि किसी मैच में लागू समीक्षा सीमा आईसीसी या संबंधित बोर्ड की खेल शर्तों से तय होती है।

एक उपयोगी, कम बताई जाने वाली बात यह है कि हॉक-आई का ग्राफ “गेंद निश्चित रूप से ऐसे ही जाती” नहीं कहता; वह उपलब्ध कैमरा डेटा से बनाया गया अनुमानित मॉडल दिखाता है। कैमरा कोण, गेंद की चमक, पिच की स्थिति और ट्रैकिंग बिंदु मॉडल की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए स्क्रीन पर स्टंप का छोटा हिस्सा दिखना और अंपायर कॉल लगना नियम की विफलता नहीं, प्रमाण की सीमा का परिणाम है।

चरण 4: रिव्यू कब बचता और कब खत्म होता है?

रिव्यू बचना या खत्म होना प्रतियोगिता के नियम और समीक्षा के अंतिम नतीजे पर निर्भर करता है। आम तौर पर सफल समीक्षा में टीम अपना रिव्यू बचा लेती है, जबकि स्पष्ट रूप से असफल समीक्षा में एक रिव्यू कम हो जाता है। अंपायर कॉल वाले मामलों में कई अंतरराष्ट्रीय खेल शर्तें समीक्षा को बचाए रखने का प्रावधान देती हैं, पर यह स्थायी सार्वभौमिक नियम नहीं है; मैच की आधिकारिक शर्त देखना जरूरी है।

टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में सामान्यतः प्रत्येक टीम को एक पारी में दो असफल समीक्षा उपलब्ध होती हैं, जबकि ट्वेंटी20 अंतरराष्ट्रीय में अक्सर एक समीक्षा प्रति पारी का ढांचा रहा है। घरेलू प्रतियोगिताएं, प्लेऑफ, महिला क्रिकेट और विशेष टूर्नामेंट अलग संख्या निर्धारित कर सकते हैं। इसलिए “हर मैच में दो रिव्यू” कहना गलत और आलसी जानकारी है। खेल के दौरान स्क्रीन पर बचे हुए रिव्यू का संकेत, प्रसारण ग्राफिक्स और आधिकारिक स्कोरकार्ड देखें।

समीक्षा की रणनीति में केवल संख्या नहीं, पारी का चरण भी महत्वपूर्ण है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाज के खिलाफ हल्का किनारा होने का संदेह हो तो विकेटकीपर की आवाज उपयोगी हो सकती है। बाद में बल्लेबाज सेट हो, स्कोर दबाव में हो और एल्बीडब्ल्यू की लाइन स्पष्ट हो, तब कप्तान जोखिम लेने पर विचार कर सकता है। फिर भी कप्तान को अंपायर कॉल की संभावना समझनी चाहिए। रिव्यू बचा लेने से कोई अतिरिक्त रन या विकेट नहीं मिलता; यह केवल भविष्य के निर्णयों के लिए उपलब्ध विकल्प बचाता है।

सटीक प्रतियोगिता-वार नियमों के लिए आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के डीआरएस नियम उपयोगी रहेगा।

Cricket captain making the T sign toward the umpire as teammates wait under stadium floodlights

नियमों को मैच प्रारूप के अनुसार मिलाकर देखना जरूरी है।

नियमों की पूरी सूची देखें

चरण 5: क्या अंतिम निर्णय की पुष्टि की जाती है?

अंतिम निर्णय की पुष्टि में टीवी अंपायर उपलब्ध रिप्ले, ध्वनि, गेंद-ट्रैकिंग और मैदानी अंपायर की जानकारी को एक साथ देखता है। निर्णय घोषित करने से पहले घटना का सही फ्रेम, गेंद की वैधता और मूल फैसले का प्रकार जांचा जाता है। इस चरण का उद्देश्य केवल तकनीकी चित्र दिखाना नहीं, बल्कि नियम के अनुसार स्पष्ट निष्कर्ष देना है।

समीक्षा प्रक्रिया सामान्यतः इस क्रम में चलती है:

  1. टीवी अंपायर समीक्षा का कारण और घटना का समय पहचानता है।
  2. जरूरत होने पर गेंद की वैधता, नो-बॉल और संपर्क-बिंदु की जांच करता है।
  3. कैच या बल्ले के किनारे में अल्ट्राएज तथा रिप्ले देखता है।
  4. एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट का क्रम जांचता है।
  5. निर्णायक प्रमाण मिलने पर फैसला बदलता है; अन्यथा मूल निर्णय रखता है।
  6. मैदान पर मौजूद अंपायर को अंतिम संकेत और प्रसारण टीम को ग्राफिक्स भेजे जाते हैं।

कैच की समीक्षा में गेंद का बल्ले से संपर्क, गेंद पर नियंत्रण और जमीन से पहले पकड़ की वैधता देखी जा सकती है। रन-आउट या स्टंपिंग में क्रीज के पीछे बल्ले या शरीर का हिस्सा, बेल्स का गिरना और गेंद के दस्ताने में होने का क्रम महत्वपूर्ण होता है। नो-बॉल जांच में फ्रंट-फुट की स्थिति और गेंद की ऊंचाई भी समीक्षा का हिस्सा बन सकती है। इसीलिए एक ही “रिव्यू” कई अलग तकनीकी सवालों का समूह होता है।

नियम विशेषज्ञों के लिए सबसे अहम बात यह है कि समीक्षा अधिकारी हर उपलब्ध कैमरा कोण का उपयोग तभी करता है जब वह निर्णय से संबंधित हो। हर फ्रेम को बराबर महत्व नहीं दिया जाता। यदि फुटेज अस्पष्ट है, तो निर्णय बदलना अनिवार्य नहीं। आईसीसी के नियमों में प्रक्रिया का उद्देश्य “स्पष्ट गलती को सुधारना” है, हर करीबी अनुमान को पलटना नहीं। दर्शक को इसी अंतर को समझना चाहिए, वरना अंपायर कॉल और असफल समीक्षा देखकर वह तकनीक को दोष देगा, जबकि समस्या प्रमाण की सीमा में हो सकती है।

सामान्य डीआरएस विफलताओं को कैसे समझें?

डीआरएस की सामान्य विफलता अक्सर तकनीक के खराब होने से नहीं, गलत समय, अस्पष्ट घटना या नियम की गलत समझ से होती है। समीक्षा विफल होने का अर्थ यह हो सकता है कि मूल फैसला सही था, प्रमाण निर्णायक नहीं था, या अनुरोध देर से आया। प्रसारण में “निर्णय बरकरार” सुनकर तुरंत यह निष्कर्ष न निकालें कि रिव्यू लेने वाली टीम ने गलत रणनीति अपनाई।

समस्या और व्यावहारिक समाधान

  • गलत समय पर संकेत: खिलाड़ी 15 सेकंड की सीमा भूल जाते हैं। समाधान: विकेटकीपर और कप्तान तुरंत संक्षिप्त संवाद करें।
  • गलत घटना की समीक्षा: गेंद और बल्ले का संपर्क एक गेंद पहले या बाद का समझ लिया जाता है। समाधान: अंपायर से घटना की पहचान स्पष्ट कराएं।
  • अंपायर कॉल की अनदेखी: एल्बीडब्ल्यू में तकनीकी अनुमान सीमा पर हो सकता है। समाधान: पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट तीनों की स्थिति अलग देखें।
  • ध्वनि को किनारा मान लेना: अल्ट्राएज की हर लहर बल्ले का प्रमाण नहीं होती। समाधान: ध्वनि का समय और गेंद का स्थान मिलाएं।
  • रिव्यू संख्या का भ्रम: टेस्ट, एकदिवसीय और ट्वेंटी20 में संख्या अलग हो सकती है। समाधान: प्रतियोगिता की आधिकारिक खेल शर्त जांचें।
  • कैमरा कोण पर निर्भरता: एक कोण से गेंद जमीन को छूती दिख सकती है, दूसरे से नहीं। समाधान: टीवी अंपायर के सभी उपलब्ध कोणों का इंतजार करें।

आईपीएल समाचार की जिम्मेदार मैच समीक्षा में “तकनीक ने गलती की” जैसी जल्दबाजी वाली पंक्ति से बचना चाहिए। पहले यह देखना चाहिए कि समस्या उपकरण, संकेत, समय-सीमा, नियम या प्रमाण की अस्पष्टता में से किसकी थी। डेटा-आधारित विश्लेषण में निर्णय का कारण, गेंद संख्या, मूल फैसला और अंतिम नतीजा साथ लिखना अधिक उपयोगी है। पाठक को इससे यह समझ आता है कि डीआरएस भाग्य का खेल नहीं, बल्कि सीमित प्रमाण और तय प्रक्रिया का संयोजन है।

अंतिम जांच के लिए क्रिकेट में अंपायर कॉल और तकनीकी सीमाएं पढ़ें।

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निष्कर्ष

क्रिकेट में डीआरएस तीन स्तरों पर काम करता है: खिलाड़ी और कप्तान समय पर समीक्षा मांगते हैं, टीवी अंपायर तकनीकी प्रमाण जांचता है और मैदानी अंपायर अंतिम संकेत लागू करता है। अल्ट्राएज बल्ले के किनारे की ध्वनि जांचता है, हॉट स्पॉट संपर्क का तापीय संकेत दिखाता है और हॉक-आई गेंद का अनुमानित मार्ग बताता है। एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट का क्रम समझे बिना फैसला पढ़ना अधूरा है। अंपायर कॉल तकनीक की कमजोरी नहीं, करीबी प्रमाण पर मूल निर्णय बचाने की नियम-व्यवस्था है। आईपीएल समाचार पर डीआरएस से जुड़े आंकड़े देखते समय प्रारूप, प्रतियोगिता और लागू खेल शर्त जरूर मिलाएं। अगली बार समीक्षा आते ही पहले मूल फैसला पहचानें, फिर तकनीक का प्रकार और अंत में रिव्यू की स्थिति देखें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में डीआरएस क्या होता है?

उत्तर: डीआरएस मैदानी अंपायर के निर्णय की तकनीकी समीक्षा करने वाली प्रणाली है। इसमें टीवी अंपायर सामान्य रिप्ले, अल्ट्राएज, हॉट स्पॉट और हॉक-आई जैसे साधनों का उपयोग कर सकता है। बल्लेबाज या क्षेत्ररक्षण कप्तान आम तौर पर लगभग 15 सेकंड के भीतर “टी” संकेत देकर समीक्षा मांगता है। अंतिम प्रक्रिया संबंधित प्रतियोगिता की खेल शर्तों के अनुसार चलती है।

प्रश्न: डीआरएस कैसे लिया जाता है?

उत्तर: खिलाड़ी या कप्तान को मैदानी अंपायर के निर्णय के तुरंत बाद दोनों हाथों से “टी” का संकेत देना होता है। बल्लेबाज अपने आउट दिए जाने की समीक्षा मांग सकता है, जबकि कप्तान नॉट आउट निर्णय को चुनौती दे सकता है। समय-सीमा सामान्यतः लगभग 15 सेकंड होती है, इसलिए पहले विकेटकीपर, गेंदबाज या साथी खिलाड़ियों से संक्षिप्त जानकारी लेना उपयोगी रहता है।

प्रश्न: डीआरएस और अंपायर कॉल में क्या अंतर है?

उत्तर: डीआरएस तकनीकी समीक्षा की पूरी प्रक्रिया है, जबकि अंपायर कॉल करीबी एल्बीडब्ल्यू परिणाम में मूल मैदानी निर्णय को बनाए रखने की व्यवस्था है। हॉक-आई पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट का अनुमान दिखाता है, लेकिन सीमा के करीब परिणाम होने पर फैसला बदलना जरूरी नहीं। ऐसे मामले में समीक्षा खर्च होने या बचने का नियम प्रतियोगिता की आधिकारिक शर्तों पर निर्भर करता है।

प्रश्न: एल्बीडब्ल्यू में डीआरएस किन चीजों की जांच करता है?

उत्तर: एल्बीडब्ल्यू समीक्षा गेंद की पिचिंग, पैड से टकराने का स्थान और स्टंप से टकराने की संभावना जांचती है। हॉक-आई गेंद के मार्ग का मॉडल बनाकर तीसरा हिस्सा दिखाता है, जबकि मैदानी अंपायर का मूल फैसला भी महत्वपूर्ण रहता है। गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच हुई हो, इम्पैक्ट अस्पष्ट हो या विकेट का अनुमान सीमा पर हो, तो समीक्षा का परिणाम मूल निर्णय के अनुसार रह सकता है।

प्रश्न: डीआरएस में अल्ट्राएज और हॉट स्पॉट में क्या अंतर है?

उत्तर: अल्ट्राएज ध्वनि-तरंग के समय से संभावित बल्ले के किनारे की जांच करता है, जबकि हॉट स्पॉट संपर्क से जुड़ा तापीय निशान दिखाने का प्रयास करता है। अल्ट्राएज में हर आवाज बल्ले का किनारा नहीं होती, क्योंकि पैड, जमीन या दस्ताने से भी ध्वनि आ सकती है। हॉट स्पॉट का परिणाम उपकरण, गेंद की गति और संपर्क की तीव्रता से प्रभावित हो सकता है।

प्रश्न: डीआरएस काम न करे या समीक्षा गलत लगे तो क्या करें?

उत्तर: समीक्षा गलत लगने पर पहले गेंद संख्या, मूल फैसला, उपलब्ध रिप्ले और लागू नियम की जांच करें। कई बार समय-सीमा समाप्त होने, गलत घटना चुनने या अंपायर कॉल के कारण निर्णय नहीं बदलता। प्रसारण ग्राफिक्स के बजाय आधिकारिक स्कोरकार्ड और प्रतियोगिता की खेल शर्त देखें, क्योंकि घरेलू क्रिकेट, आईपीएल, टेस्ट और ट्वेंटी20 में समीक्षा नियम अलग हो सकते हैं।

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IPL समाचार · The High-Stakes Editorial · No. 01

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