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क्रिकेट प्रशंसकों की शीर्ष 5 नो-बॉल नियम मार्गदर्शिका 2026
विशेष विश्लेषण

क्रिकेट प्रशंसकों की शीर्ष 5 नो-बॉल नियम मार्गदर्शिका 2026

नो-बॉल गेंदबाज़ की ऐसी अवैध डिलीवरी है जिस पर बल्लेबाज़ी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती। क्रिकेट में नो-बॉल के नियम एमसीसी के नियमों और आईसीसी की प्रतियोगिता शर्...

22 अक्टूबर 2026 5 min read
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क्रिकेट प्रशंसकों की शीर्ष 5 नो-बॉल नियम मार्गदर्शिका 2026

नो-बॉल गेंदबाज़ की ऐसी अवैध डिलीवरी है जिस पर बल्लेबाज़ी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती। क्रिकेट में नो-बॉल के नियम एमसीसी के नियमों और आईसीसी की प्रतियोगिता शर्तों पर आधारित हैं; भारत में आईपीएल, टी20 अंतरराष्ट्रीय, वनडे और टेस्ट में कुछ सीमाएँ अलग हो सकती हैं। फ्रंट-फुट का क्रीज़ से आगे जाना, कमर से ऊपर फुलटॉस और खतरनाक बाउंसर इसके प्रमुख कारण हैं। नो-बॉल पर बल्लेबाज़ सामान्यतः बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं हो सकता, लेकिन रन-आउट संभव रहता है। सीमित ओवरों में आईसीसी नियमों के अनुसार अगली गेंद फ्री-हिट हो सकती है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में सामान्यतः ऐसा नहीं होता। अंतिम निर्णय मैदान पर अंपायर देता है; इसलिए प्रारूप की खेल-शर्तें देखकर नियम समझना सबसे सही तरीका है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में अंपायर नो-बॉल का संकेत देते हुए, गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ सावधान मुद्रा में

क्रिकेट में नो-बॉल को केवल “एक अतिरिक्त रन” समझना अधूरा ज्ञान है। असली असर यह है कि गेंद कानूनी डिलीवरी नहीं मानी जाती, बल्लेबाज़ को अतिरिक्त अवसर मिलता है और कई आउट होने के रास्ते बंद हो जाते हैं। यही छोटी-सी बात मैच का रुख बदल देती है, इसलिए आईपीएल समाचार पर मैच समीक्षा पढ़ते समय स्कोरकार्ड में नो-बॉल, फ्री-हिट और अतिरिक्त रनों को अलग-अलग देखना चाहिए। क्रिकेट स्कोरकार्ड समझने की शुरुआती मार्गदर्शिका

और अधिक नियम जानने के लिए यह जानकारी देखें।

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शीर्ष 5 नो-बॉल नियम एक नज़र में

यह पाँच नियम क्रिकेट में नो-बॉल के अधिकांश फैसलों को समझने के लिए पर्याप्त आधार देते हैं। पहले स्थान पर फ्रंट-फुट नियम है, क्योंकि तेज़ गेंदबाज़ों की सबसे आम गलती यही होती है; इसके बाद कमर से ऊपर फुलटॉस, बाउंसर की ऊँचाई, नो-बॉल पर आउट और फ्री-हिट का प्रभाव आते हैं। ध्यान रहे, आईसीसी की अंतरराष्ट्रीय शर्तें और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की प्रतियोगिता शर्तें किसी विशेष टूर्नामेंट में अलग सीमा तय कर सकती हैं।

  1. फ्रंट-फुट नो-बॉल — गेंद छोड़ते समय अगला पैर पॉपिंग क्रीज़ के पीछे वैध स्थिति में होना चाहिए।
  2. कमर से ऊपर फुलटॉस — सामान्य सीधी मुद्रा में बल्लेबाज़ की कमर से ऊपर पहुँची गेंद नो-बॉल हो सकती है।
  3. खतरनाक बाउंसर — बल्लेबाज़ के सिर या शरीर की ओर असुरक्षित ऊँचाई वाली छोटी गेंद दंडित की जा सकती है।
  4. नो-बॉल पर आउट की सीमा — रन-आउट, क्षेत्ररक्षण में बाधा और गेंद को दो बार मारना कुछ प्रमुख अपवाद हैं।
  5. फ्री-हिट — वनडे और टी20 जैसे सीमित ओवर प्रारूपों में अगली गेंद पर बल्लेबाज़ को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

पहला नियम: फ्रंट-फुट कहाँ होना चाहिए?

फ्रंट-फुट नो-बॉल तब होती है जब गेंद छोड़ते समय गेंदबाज़ के अगले पैर का कोई हिस्सा पॉपिंग क्रीज़ के पीछे वैध क्षेत्र में नहीं रहता। पीछे वाला पैर रिटर्न क्रीज़ के भीतर और उसकी रेखा को न छूते हुए होना चाहिए; केवल पैर का थोड़ा-सा आगे निकलना भी पर्याप्त है। यही कारण है कि तीसरा अंपायर धीमे चित्रों में जूते और क्रीज़ की स्थिति देखता है।

गेंदबाज़ी क्रीज़ और पॉपिंग क्रीज़ का चित्र सहित विवरण

पहला नियम क्यों सबसे महत्वपूर्ण है?

फ्रंट-फुट नो-बॉल सबसे सामान्य नो-बॉल है क्योंकि तेज़ गेंदबाज़ रन-अप की गति में अंतिम कदम पर शरीर का संतुलन खो सकते हैं। एमसीसी के नियम 21 में गेंदबाज़ी की वैधता का आधार पैर की स्थिति है, न कि गेंद की गति या बल्लेबाज़ द्वारा गेंद खेलना। यदि पैर स्पष्ट रूप से रेखा के आगे है, तो बल्लेबाज़ गेंद मिस करे, रन न बने या कैच पकड़ा जाए, फिर भी डिलीवरी नो-बॉल रहेगी।

आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय मैचों में तीसरा अंपायर फ्रंट-फुट की जाँच कर सकता है, लेकिन हर गेंद का निर्णय तकनीकी समीक्षा तक पहुँचे, यह आवश्यक नहीं। मैदान पर अंपायर का संकेत निर्णायक होता है, जब तक समीक्षा प्रणाली के अंतर्गत निर्णय बदला न जाए। एक उपयोगी व्यावहारिक संकेत यह है कि गेंदबाज़ का पंजा नहीं, बल्कि क्रीज़ से उसका पूरा संबंध देखा जाता है; केवल एड़ी पीछे होने से वैध गेंद नहीं बनती। एमसीसी के आधिकारिक क्रिकेट नियम

दूसरा नियम: कमर से ऊपर फुलटॉस कब नो-बॉल होती है?

कमर से ऊपर फुलटॉस वह गेंद है जो पिच पर टप्पा खाए बिना बल्लेबाज़ की कमर से ऊपर पहुँचती है और उसे सामान्य सीधी मुद्रा में खतरनाक या नियम-विरुद्ध माना जाता है। सीमित ओवरों के क्रिकेट में गेंद की ऊँचाई अक्सर बल्लेबाज़ के क्रीज़ पर खड़े होने के स्थान और अनुमानित कमर के स्तर से तय होती है। इसलिए अंपायर केवल गेंद की उड़ान नहीं, बल्लेबाज़ की स्थिति भी देखता है।

कमर से ऊपर फुलटॉस का निर्णय गेंद छोड़ते समय नहीं, बल्लेबाज़ के पास पहुँचते समय दिखाई देने वाली ऊँचाई पर आधारित होता है। यदि गेंद कमर से ऊपर है लेकिन धीमी है, तो भी नो-बॉल का निर्णय प्रारूप की शर्तों पर निर्भर कर सकता है; वहीं तेज़ और खतरनाक बीमर पर चेतावनी, गेंदबाज़ी से हटाना या अतिरिक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। यह वह जगह है जहाँ टीवी दर्शक अक्सर गलती करते हैं: हर ऊँची गेंद एक जैसी नहीं होती, और कमर की ऊँचाई स्थिर माप नहीं मानी जाती।

एमसीसी नियम 41.7 और आईसीसी की खेल-शर्तें खतरनाक छोटी गेंद तथा कमर से ऊपर फुलटॉस के बीच अंतर रखती हैं। आईपीएल में मैच अधिकारी प्रसारण तकनीक, अंपायर की स्थिति और प्रतियोगिता निर्देशों को साथ देखकर निर्णय लेते हैं। इसलिए किसी पुराने टेस्ट मैच का उदाहरण सीधे आईपीएल या टी20 अंतरराष्ट्रीय पर लागू करना ठीक नहीं है। आईसीसी के आधिकारिक खेल नियम और शर्तें

इस अंतर को समझना हो तो यह संदर्भ भी उपयोगी है।

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तीसरा नियम: बाउंसर कब नो-बॉल मानी जाती है?

बाउंसर की वैधता उसकी ऊँचाई, गति, बल्लेबाज़ की सुरक्षा और प्रतियोगिता में तय अधिकतम संख्या से जुड़ी होती है। यदि छोटी गेंद बल्लेबाज़ के सिर के ऊपर से निकलती है या अंपायर उसे खतरनाक मानता है, तो नो-बॉल दी जा सकती है; सीमित ओवरों में प्रति ओवर बाउंसर की संख्या भी प्रतियोगिता नियमों से नियंत्रित होती है। टेस्ट, वनडे, टी20 और घरेलू क्रिकेट में ये सीमाएँ एक जैसी नहीं होतीं।

एमसीसी के मूल नियम गेंद की खतरनाकता पर जोर देते हैं, जबकि आईसीसी की प्रतियोगिता शर्तें प्रति ओवर बाउंसर की गिनती और सिर से ऊपर जाने वाली गेंद के संकेत को अधिक स्पष्ट करती हैं। उदाहरण के लिए, टी20 अंतरराष्ट्रीय में बाउंसर की अनुमति और ऊँचाई सीमा वनडे या टेस्ट से अलग हो सकती है। यही कारण है कि स्कोरकार्ड पर “नो-बॉल” देखकर यह मान लेना गलत है कि हर बार गेंदबाज़ ने फ्रंट-फुट आगे किया था।

गेंदबाज़ के लिए जोखिम केवल अतिरिक्त रन नहीं है। लगातार खतरनाक बाउंसर पर अंपायर चेतावनी दे सकता है और प्रतियोगिता की आचार-संहिता के अनुसार गेंदबाज़ को आक्रमण से हटाया भी जा सकता है। बल्लेबाज़ी पक्ष को यहाँ रणनीतिक लाभ मिलता है, क्योंकि ऊँची नो-बॉल के बाद फ्री-हिट, अतिरिक्त रन और गेंदबाज़ पर दबाव तीनों एक साथ आ सकते हैं। बाउंसर और यॉर्कर की रणनीति समझें

तेज़ गेंदबाज़ की उछलती बाउंसर के सामने बल्लेबाज़ हेलमेट में तैयार, लाल गेंद हवा में

चौथा नियम: नो-बॉल पर बल्लेबाज़ किन तरीकों से आउट हो सकता है?

नो-बॉल पर बल्लेबाज़ सामान्यतः बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं होता। हालांकि रन-आउट, क्षेत्ररक्षण में बाधा और गेंद को जानबूझकर या नियम-विरुद्ध तरीके से दो बार मारने जैसे अपवाद लागू रहते हैं। इसलिए नो-बॉल पर कैच पकड़े जाने के बाद बल्लेबाज़ का बच जाना सामान्य नियम है, कोई अंपायर की गलती नहीं।

नो-बॉल पर रन-आउट का नियम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि बल्लेबाज़ रन लेने के लिए आगे निकलता है और क्षेत्ररक्षक विकेट गिरा देता है, तो रन-आउट दिया जा सकता है, क्योंकि यह गेंद की वैधता पर निर्भर नहीं करता। इसी तरह, बल्लेबाज़ द्वारा क्षेत्ररक्षक को जानबूझकर रोकना अलग अपराध हो सकता है। मगर विकेटकीपर द्वारा क्रीज़ से बाहर निकले बल्लेबाज़ को सीधे स्टंप करना नो-बॉल पर स्टंपिंग नहीं माना जाएगा।

एक और कम समझा गया बिंदु यह है कि नो-बॉल पर बने रन केवल दंड रन तक सीमित नहीं रहते। बल्ले से मिले रन, दौड़कर लिए गए बाई या लेग-बाई और नो-बॉल का एक रन स्कोर में जोड़े जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, बल्लेबाज़ ने गेंद पर चार रन बनाए और वह नो-बॉल थी, तो टीम को कम-से-कम पाँच रन मिलेंगे; यदि गेंद सीमा रेखा तक नो-बॉल के रूप में चली गई, तो प्रतियोगिता नियमों के अनुसार कुल पाँच रन दर्ज हो सकते हैं।

पाँचवाँ नियम: फ्री-हिट का असली प्रभाव क्या है?

फ्री-हिट सीमित ओवरों के क्रिकेट में नो-बॉल के बाद आने वाली ऐसी डिलीवरी है जिसमें बल्लेबाज़ सामान्यतः केवल रन-आउट, क्षेत्ररक्षण में बाधा या गेंद को दो बार मारने जैसे तरीकों से आउट हो सकता है। फ्री-हिट टेस्ट क्रिकेट का सार्वभौमिक नियम नहीं है; इसे आईसीसी वनडे और टी20 खेल-शर्तों में लागू किया जाता है। इसलिए प्रारूप देखे बिना फ्री-हिट मान लेना गलत है।

फ्री-हिट का मतलब यह नहीं कि बल्लेबाज़ को हर प्रकार की गलती से पूर्ण छूट मिल गई। यदि वह रन लेने के दौरान क्रीज़ से बाहर है और विकेट टूट जाता है, तो रन-आउट हो सकता है। गेंदबाज़ भी फील्डिंग स्थान, गेंद की दिशा और ओवर की शेष डिलीवरी के हिसाब से योजना बदल सकता है; केवल बल्लेबाज़ का आक्रामक शॉट ही एकमात्र विकल्प नहीं होता।

यहाँ एक उपयोगी स्कोरकार्ड संकेत है: नो-बॉल की पंक्ति और अगली गेंद के सामने फ्री-हिट चिह्न को अलग-अलग देखें। कुछ प्रसारणों में फ्री-हिट का ग्राफिक तुरंत दिखता है, पर समीक्षा समाप्त होने तक निर्णय बदल भी सकता है। यदि तीसरा अंपायर नो-बॉल वापस लेता है, तो फ्री-हिट भी समाप्त हो सकती है। यह छोटा-सा परिचालन अंतर सामान्य लेखों में अक्सर छूट जाता है, लेकिन लाइव मैच देखने वालों के लिए काफी काम का है।

अब नियमों को स्कोर और रणनीति से जोड़कर देखें।

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नो-बॉल का स्कोर कैसे गिना जाता है?

नो-बॉल पर दंड के रूप में कम-से-कम 1 रन बल्लेबाज़ी टीम को मिलता है और वह डिलीवरी ओवर की छह वैध गेंदों में शामिल नहीं होती। इसके ऊपर बल्ले से बने रन, बाई, लेग-बाई या सीमा रेखा से जुड़े रन अलग से जुड़ सकते हैं। यही कारण है कि एक नो-बॉल पर कुल स्कोर 1, 2, 4, 5 या उससे अधिक हो सकता है।

उदाहरणों से बात साफ होती है:

  • गेंद नो-बॉल है और बल्लेबाज़ कोई रन नहीं लेता: 1 अतिरिक्त रन।
  • नो-बॉल पर बल्लेबाज़ 2 रन दौड़ता है: कुल 3 रन।
  • नो-बॉल पर बल्ले से चौका लगता है: कुल 5 रन, जिसमें 1 नो-बॉल रन शामिल है।
  • गेंद नो-बॉल है और बल्लेबाज़ उसे छूता नहीं, फिर गेंद वाइड क्षेत्र में चली जाती है: नो-बॉल और वाइड की गणना प्रतियोगिता नियमों के अनुसार अलग तरीके से दर्ज हो सकती है; अंपायर का संकेत निर्णायक होगा।

एमसीसी की भाषा में नो-बॉल के कारण बने सभी रन बल्लेबाज़ी टीम के खाते में आते हैं, लेकिन बल्लेबाज़ के व्यक्तिगत रन और अतिरिक्त रन अलग-अलग दर्ज किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, नो-बॉल पर बल्ले से चार रन मिलने पर बल्लेबाज़ को चार रन और टीम को अतिरिक्त में एक रन मिलता है। इसी तरह, बाई और लेग-बाई बल्लेबाज़ के व्यक्तिगत स्कोर में नहीं जुड़ते।

क्रिकेट स्कोरर इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड पर नो-बॉल, अतिरिक्त रन और फ्री-हिट दर्ज करते हुए

नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?

नो-बॉल मुख्यतः गेंदबाज़ की डिलीवरी, पैर या गेंद की ऊँचाई से जुड़ी गलती है, जबकि वाइड ऐसी गेंद है जो बल्लेबाज़ की सामान्य पहुँच से बाहर जाती है और वैध स्ट्राइक क्षेत्र में नहीं आती। दोनों पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती। मगर नो-बॉल पर फ्री-हिट और आउट होने की सीमाएँ वाइड से अलग प्रभाव पैदा करती हैं।

वाइड पर बल्लेबाज़ स्टंप हो सकता है, जबकि नो-बॉल पर सामान्य स्टंपिंग नहीं दी जाती। नो-बॉल पर बल्लेबाज़ को बल्ले से रन बनाने की अधिक स्वतंत्रता भी मिलती है, क्योंकि डिलीवरी पहले ही अवैध घोषित हो चुकी होती है। दूसरी ओर, वाइड का फैसला बल्लेबाज़ की स्थिति, गेंद की दिशा और उसके शॉट के प्रयास पर निर्भर कर सकता है।

यहाँ एक कम चर्चित स्थिति भी है: यदि बल्लेबाज़ गेंद को खेलने का प्रयास करता है और गेंद उसके पास से निकलती है, तो उसे वाइड कहना हमेशा सही नहीं होता। इसी तरह, गेंद बल्लेबाज़ के शरीर से टकराकर अतिरिक्त रन दे सकती है, लेकिन अंपायर को नो-बॉल और लेग-बाई के नियम साथ देखने पड़ते हैं। वाइड, बाई और लेग-बाई का पूरा अंतर

नियम तय करने में एमसीसी और आईसीसी की भूमिका क्या है?

एमसीसी क्रिकेट के मूल नियम प्रकाशित करता है, जबकि आईसीसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उन्हीं नियमों पर आधारित खेल-शर्तें लागू करता है। इसलिए “नो-बॉल का नियम” एक ही वाक्य में समाप्त नहीं होता; टेस्ट, वनडे, टी20 अंतरराष्ट्रीय, आईपीएल और घरेलू प्रतियोगिताएँ अपनी परिचालन सीमाएँ जोड़ सकती हैं। मैच से पहले की खेल-शर्तें ही अंतिम संदर्भ होती हैं।

एमसीसी के आधिकारिक नियमों में नो-बॉल, खतरनाक और अनुचित गेंदबाज़ी, गेंद की वैधता और बल्लेबाज़ के आउट होने से जुड़े प्रावधान अलग-अलग भागों में दिए गए हैं। आईसीसी प्रतियोगिताएँ तकनीकी समीक्षा, फ्री-हिट, बाउंसर सीमा और अनुशासनात्मक कार्रवाई को अधिक विशिष्ट भाषा में निर्धारित करती हैं। एमसीसी का मूल सिद्धांत सीधा है: “गेंद वैध नहीं है” — लेकिन उसके बाद रन, आउट और अगली गेंद के नियम अलग प्रावधानों से तय होते हैं।

आईपीएल समाचार की मैच रिपोर्ट पढ़ते समय केवल नो-बॉल की संख्या न देखें। यह भी जाँचें कि नो-बॉल किस कारण दी गई, क्या फ्री-हिट मिली, कितने अतिरिक्त रन बने और गेंदबाज़ पर कोई चेतावनी दर्ज हुई या नहीं। एक ही ओवर में दो नो-बॉल होना केवल स्कोर की समस्या नहीं, बल्कि गेंदबाज़ी नियंत्रण और टीम रणनीति की समस्या भी है।

कौन-सा नो-बॉल नियम सबसे अधिक मैच बदलता है?

फ्रंट-फुट नो-बॉल सबसे सामान्य है, लेकिन सीमित ओवरों में फ्री-हिट और कमर से ऊपर फुलटॉस का संयुक्त प्रभाव मैच पर सबसे बड़ा पड़ सकता है। एक नो-बॉल से अतिरिक्त रन, ओवर में अतिरिक्त अवसर, बल्लेबाज़ के बचने की संभावना और आक्रामक अगली गेंद—चार लाभ एक साथ मिलते हैं। इसलिए महँगी नो-बॉल का मूल्य केवल एक रन नहीं माना जाना चाहिए।

रणनीतिक रूप से गेंदबाज़ को पहले अपनी लंबाई और क्रीज़ की स्थिति नियंत्रित करनी चाहिए, फिर गति या स्विंग पर ध्यान देना चाहिए। बल्लेबाज़ी टीम को फ्री-हिट पर हर बार छक्का मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए; सुरक्षित दो रन, सीमा रेखा के बीच शॉट और स्ट्राइक बदलना भी बेहतर विकल्प हो सकते हैं। डेटा आधारित मैच विश्लेषण में नो-बॉल की दर, पावरप्ले के अतिरिक्त रन और फ्री-हिट पर बने रन अलग-अलग देखे जाते हैं।

विरोधाभासी बात यह है कि अधिक आक्रामक गेंदबाज़ हमेशा अधिक नो-बॉल नहीं डालता। लंबे रन-अप, अंतिम कदम की अस्थिरता और धीमी गेंद के समय हाथ की ऊँचाई जैसे तकनीकी कारण अधिक निर्णायक हो सकते हैं। इसलिए केवल तेज़ गेंदबाज़ को दोष देना आसान निष्कर्ष है, सही निष्कर्ष नहीं।

क्रिकेट में नो-बॉल के नियम समझने के लिए अंतिम चयन कैसे करें?

यदि आप दर्शक हैं, तो पहले फ्रंट-फुट, कमर से ऊपर फुलटॉस, बाउंसर सीमा, आउट के अपवाद और फ्री-हिट—इन पाँच बिंदुओं को याद करें। यदि आप स्कोरकार्ड पढ़ते हैं, तो नो-बॉल रन, बल्लेबाज़ के रन, अतिरिक्त रन और ओवर में फेंकी गई वैध गेंदों को अलग रखें। यदि आप मैच का विश्लेषण करते हैं, तो आईसीसी या संबंधित टूर्नामेंट की खेल-शर्तें देखे बिना निष्कर्ष न निकालें।

तेज़ संदर्भ सूची:

  1. नो-बॉल पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है।
  2. नो-बॉल ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती।
  3. सीमित ओवरों में अगली गेंद फ्री-हिट हो सकती है।
  4. नो-बॉल पर कैच, बोल्ड, एलबीडब्ल्यू और सामान्य स्टंपिंग से आउट नहीं दिया जाता।
  5. रन-आउट, क्षेत्ररक्षण में बाधा और गेंद को दो बार मारना अपवाद हो सकते हैं।
  6. टेस्ट, वनडे, टी20 और आईपीएल में बाउंसर तथा फ्री-हिट की शर्तें अलग हो सकती हैं।

आईपीएल समाचार पर नियम आधारित मैच समीक्षा पढ़ते समय यही छह जाँच-बिंदु पर्याप्त हैं। अंपायर का संकेत अंतिम होता है, और तकनीकी समीक्षा होने पर निर्णय बदलने की संभावना प्रतियोगिता प्रोटोकॉल पर निर्भर करती है।

भारतीय टी20 मैच में बल्लेबाज़ फ्री-हिट के लिए तैयार, अंपायर हाथ से संकेत देते हुए

अब नियमों को याद रखने का सबसे सरल तरीका यही है: पैर, ऊँचाई, बाउंसर, रन और अगली गेंद—इन्हें क्रम से जाँचें। अधिक जानकारी के लिए यह मार्गदर्शिका सुरक्षित रखें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में नो-बॉल क्या होती है?

उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज़ की ऐसी अवैध डिलीवरी है जिस पर बल्लेबाज़ी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती। फ्रंट-फुट का क्रीज़ से आगे जाना, कमर से ऊपर फुलटॉस और खतरनाक बाउंसर इसके सामान्य कारण हैं। सीमित ओवरों में नो-बॉल के बाद फ्री-हिट भी मिल सकती है। अंतिम निर्णय मैदान पर अंपायर देता है।

प्रश्न: नो-बॉल पर कितने रन मिलते हैं?

उत्तर: नो-बॉल पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन कुल रन गेंद पर बने अतिरिक्त रन के अनुसार बढ़ सकते हैं। यदि बल्लेबाज़ नो-बॉल पर चौका लगाता है, तो टीम को सामान्यतः 5 रन मिलते हैं और बल्लेबाज़ के खाते में 4 रन दर्ज होते हैं। दौड़कर लिए गए रन, बाई और लेग-बाई अलग नियमों के अनुसार स्कोर होते हैं।

प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?

उत्तर: नो-बॉल गेंद की वैधता, पैर की स्थिति या खतरनाक ऊँचाई से जुड़ी होती है, जबकि वाइड बल्लेबाज़ की पहुँच से बाहर गई गेंद होती है। दोनों पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद दोबारा फेंकी जाती है। मगर नो-बॉल पर सामान्य स्टंपिंग नहीं होती और सीमित ओवरों में फ्री-हिट मिल सकती है, जबकि वाइड पर स्टंपिंग संभव है।

प्रश्न: नो-बॉल पर बल्लेबाज़ कैसे आउट हो सकता है?

उत्तर: नो-बॉल पर बल्लेबाज़ रन-आउट, क्षेत्ररक्षण में बाधा या गेंद को दो बार मारने जैसे तरीकों से आउट हो सकता है। बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू और सामान्य स्टंपिंग नो-बॉल पर मान्य आउट नहीं होते। यदि बल्लेबाज़ रन लेने के दौरान क्रीज़ से बाहर है और क्षेत्ररक्षक विकेट गिरा देता है, तो रन-आउट दिया जा सकता है।

प्रश्न: क्या हर नो-बॉल के बाद फ्री-हिट मिलती है?

उत्तर: वनडे और टी20 जैसे सीमित ओवरों के अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में नो-बॉल के बाद सामान्यतः फ्री-हिट मिलती है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में यह सामान्य नियम नहीं है। घरेलू टूर्नामेंट, आईपीएल और अन्य प्रतियोगिताएँ अपनी खेल-शर्तों में विवरण दे सकती हैं। तकनीकी समीक्षा में नो-बॉल का निर्णय बदलने पर उससे जुड़ी फ्री-हिट भी समाप्त हो सकती है।

प्रश्न: कमर से ऊपर फुलटॉस हमेशा नो-बॉल क्यों मानी जाती है?

उत्तर: कमर से ऊपर पहुँची फुलटॉस कई प्रतियोगिता शर्तों में नो-बॉल होती है क्योंकि वह बल्लेबाज़ के लिए खतरनाक हो सकती है। अंपायर बल्लेबाज़ की सामान्य सीधी मुद्रा, गेंद की ऊँचाई और उसकी गति को ध्यान में रखता है। तेज़ बीमर पर नो-बॉल के अलावा गेंदबाज़ को चेतावनी या अनुशासनात्मक कार्रवाई भी मिल सकती है।

प्रश्न: बाउंसर नो-बॉल कब बनती है?

उत्तर: बाउंसर तब नो-बॉल बन सकती है जब वह बल्लेबाज़ के सिर के ऊपर से खतरनाक ऊँचाई पर जाए या प्रतियोगिता में तय बाउंसर सीमा का उल्लंघन हो। टेस्ट, वनडे, टी20 और आईपीएल में प्रति ओवर अनुमति तथा ऊँचाई से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए संबंधित मैच की आईसीसी या टूर्नामेंट खेल-शर्तें देखना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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IPL समाचार · The High-Stakes Editorial · No. 01

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