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क्रिकेट के नियम: शुरुआती लोगों से छिपी 7 जरूरी बातें
विशेष विश्लेषण

क्रिकेट के नियम: शुरुआती लोगों से छिपी 7 जरूरी बातें

क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए उतने कठिन नहीं हैं जितने टीवी प्रसारण उन्हें बना देते हैं। क्रिकेट में दो टीमें खेलती हैं, मैदान पर एक समय में 11-11 खिलाड़ी होते हैं और बल्लेबाजी करने वाली टीम रन...

24 अक्टूबर 2026 5 min read
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क्रिकेट के नियम: शुरुआती लोगों से छिपी 7 जरूरी बातें

क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए उतने कठिन नहीं हैं जितने टीवी प्रसारण उन्हें बना देते हैं। क्रिकेट में दो टीमें खेलती हैं, मैदान पर एक समय में 11-11 खिलाड़ी होते हैं और बल्लेबाजी करने वाली टीम रन बनाने की कोशिश करती है, जबकि गेंदबाजी करने वाली टीम विकेट लेकर पारी रोकती है। टेस्ट क्रिकेट में अधिकतम पांच दिन, एकदिवसीय क्रिकेट में 50 ओवर और टी20 क्रिकेट में 20 ओवर प्रति पारी होते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियम और मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट कानून आधार माने जाते हैं। छह वैध गेंदों का एक ओवर होता है, लेकिन नो-बॉल और वाइड उस गिनती में शामिल नहीं होते। सबसे पहले टॉस, पारी, रन और विकेट का संबंध समझें; फिर आउट होने के सात तरीकों और अतिरिक्त रनों पर ध्यान दें। यही क्रम अपनाने से स्कोरकार्ड पढ़ना और मैच समझना दोनों आसान हो जाते हैं।

धूप भरे क्रिकेट मैदान में बल्लेबाज क्रीज पर खड़ा, विकेटकीपर और गेंदबाज अगली गेंद के लिए तैयार

सीधी बात: क्रिकेट का असली ढांचा क्या है?

क्रिकेट का मूल ढांचा सरल है: एक टीम बल्लेबाजी करके रन बनाती है, दूसरी टीम गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण करके विकेट लेने तथा रन रोकने की कोशिश करती है। लक्ष्य तय ओवरों या उपलब्ध समय में विपक्षी टीम से अधिक रन बनाना है। यह बात सुनकर नियम हल्के लगते हैं, लेकिन टॉस, पावरप्ले, क्रीज, अतिरिक्त रन और लक्ष्य-गणना में ही शुरुआती दर्शक अक्सर फंसते हैं।

एक क्रिकेट मैच पारी में बंटा होता है। सीमित ओवर क्रिकेट में दोनों टीमों को समान संख्या में ओवर मिलते हैं, जबकि टेस्ट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में समय तथा घोषित पारी अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसे देशों के मुकाबलों में प्रारूप बदलते ही रणनीति भी बदलती है; टी20 में हर गेंद महंगी होती है, जबकि टेस्ट में धैर्य और विकेट बचाना बड़ी बात है।

मैच की शुरुआत टॉस से होती है। टॉस जीतने वाला कप्तान पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनता है, हालांकि मौसम, पिच और ओस का असर निर्णय बदल सकता है। दो अंपायर मैदान पर फैसले देते हैं, तीसरा अंपायर वीडियो समीक्षा करता है और मैच रेफरी अनुशासन तथा आधिकारिक घटनाओं की निगरानी करता है। आईसीसी के आधिकारिक नियम और खेल शर्तें प्रारूप के अनुसार कुछ विवरण बदल सकती हैं।

आईपीएल, बिग बैश लीग और आईसीसी विश्व कप जैसे आयोजनों में दर्शकों को अक्सर एक जैसी मूल संरचना दिखाई देती है, लेकिन पावरप्ले, समीक्षा और ओवर-रेट की शर्तें प्रतियोगिता के नियमों में अलग ढंग से लिखी जा सकती हैं। इसलिए केवल कमेंटेटर की एक पंक्ति पर भरोसा मत कीजिए; स्कोरकार्ड पर प्रारूप और खेल शर्तें भी देखिए। यही वह छोटी आदत है जिसे नए दर्शक लगातार नजरअंदाज करते हैं।

क्रिकेट के आधारभूत ढांचे का संक्षिप्त सार:

  • एक टीम बल्लेबाजी करती है और दूसरी टीम गेंदबाजी तथा क्षेत्ररक्षण।
  • बल्लेबाज रन बनाकर स्कोर बढ़ाते हैं।
  • गेंदबाज बल्लेबाज को आउट करने या रन रोकने का प्रयास करता है।
  • छह वैध गेंदों के बाद एक ओवर पूरा होता है।
  • अधिक रन वाली टीम सामान्यतः विजेता होती है।
  • बराबरी होने पर प्रारूप के अनुसार सुपर ओवर, टाई या साझा परिणाम लागू हो सकता है।

अब आधिकारिक नियमों और मैच संरचना का व्यावहारिक सार देखना हो तो यह उपयोगी संदर्भ खोलें।

और जानें

दर्शक वास्तव में क्या देखते हैं?

टीवी पर दिखने वाला स्कोरकार्ड मैच की भाषा है। यदि स्कोर 167/3 है, तो 167 रन बने और तीन विकेट गिर चुके हैं; इसका अर्थ यह नहीं कि तीन ओवर पूरे हुए। बल्लेबाज के नाम के सामने रन और गेंदें, गेंदबाज के सामने ओवर, मेडन, रन और विकेट लिखे होते हैं। उदाहरण के लिए 4-0-28-2 का अर्थ है चार ओवर, शून्य मेडन, 28 रन और दो विकेट।

मैदान पर दो बल्लेबाज होते हैं। स्ट्राइकर गेंद का सामना करता है और नॉन-स्ट्राइकर दूसरे छोर पर रहता है। रन लेने के लिए दोनों बल्लेबाज अपने-अपने छोर बदलते हैं; एक पूरा बदलाव एक रन देता है। गेंद सीमा रेखा तक जमीन पर जाकर पहुंचे तो चार रन मिलते हैं, जबकि हवा में सीमा पार करे तो छह रन मिलते हैं। बल्लेबाज दौड़कर तीन रन ले सकता है और उसी गेंद पर ओवरथ्रो से अतिरिक्त रन भी जुड़ सकते हैं।

क्रीज की रेखाएं केवल सजावट नहीं हैं। बल्लेबाज का बल्ला या शरीर क्रीज के पीछे जमीन से संपर्क में है तो वह सुरक्षित माना जाता है। रन आउट में गेंद विकेट गिराने से पहले बल्लेबाज का सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचना जरूरी है। स्टंपिंग में विकेटकीपर गेंद पकड़कर विकेट गिराता है और बल्लेबाज क्रीज से बाहर होता है, लेकिन बल्लेबाज ने रन लेने का प्रयास किया या नहीं, यह स्थिति के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकता है।

क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ने की शुरुआती मार्गदर्शिका

गेंदबाज का छोर बदल सकता है, मगर एक ही ओवर में लगातार दोनों छोर से गेंदबाजी नहीं कर सकता। ओवर पूरा होने के बाद नया ओवर दूसरे छोर से शुरू होता है। इसी कारण स्कोरकार्ड में गेंदबाजों का क्रम और बल्लेबाजों का स्ट्राइक बदलना नए दर्शकों को उलझाता है। ध्यान रखें: हर गेंद के बाद स्ट्राइक बदलना जरूरी नहीं, केवल रन और ओवर की स्थिति के अनुसार बदलाव होता है।

रन के मुख्य प्रकार इस प्रकार हैं:

  1. बल्लेबाज के बल्ले से बने रन, जैसे एक, दो, तीन, चार या छह।
  2. लेग-बाय, जब गेंद बल्ले से न लगकर शरीर से टकराए और बल्लेबाज दौड़े।
  3. बाय, जब गेंद बल्ले या शरीर से बिना संपर्क के निकल जाए और बल्लेबाज दौड़ें।
  4. नो-बॉल, जो गेंदबाज की गलती पर मिलता है।
  5. वाइड, जब गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बाहर हो।
  6. पेनल्टी रन, जो नियम उल्लंघन या विशेष परिस्थितियों में दिए जाते हैं।

कठिन शब्दों को रटने के बजाय हर गेंद में तीन सवाल पूछिए: गेंद वैध थी या नहीं, रन किस खाते में गया, और विकेट किस तरीके से गिरा। यह तरीका कमेंट्री से अधिक भरोसेमंद है। क्रिकेट-केंद्रित साइट IPL समाचार पर मैच समीक्षा और खिलाड़ी आंकड़े पढ़ते समय भी इसी ढांचे से स्कोर समझें; नाम बदलते हैं, मूल गणना नहीं।

तीन बातें सबसे ज्यादा मायने क्यों रखती हैं?

तीन चीजें शुरुआती दर्शक को क्रिकेट समझने में सबसे अधिक मदद करती हैं: वैध गेंद की पहचान, विकेट के प्रकार की पहचान और लक्ष्य की सही गणना। इन तीनों को समझ लेने पर पावरप्ले, रन रेट और रणनीति अपने-आप स्पष्ट होने लगते हैं। संक्षेप में, हर गेंद का परिणाम रन, विकेट, डॉट गेंद या अतिरिक्त रन के रूप में पढ़िए।

1. वैध गेंद और ओवर की गिनती

एक ओवर में छह वैध गेंदें होती हैं। नो-बॉल या वाइड पर रन जुड़ता है, लेकिन गेंद ओवर की छह गेंदों में नहीं गिनी जाती। मान लीजिए गेंदबाज ने पांच वैध गेंदें फेंकीं और अगली गेंद वाइड हुई; ओवर अभी पूरा नहीं हुआ। इसके बाद फिर वैध गेंद फेंकी जाएगी। यही कारण है कि कभी-कभी एक ओवर में छह से अधिक गेंदें दिखाई देती हैं।

नो-बॉल पर सामान्यतः बल्लेबाजी करने वाली टीम को एक अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन प्रतियोगिता की खेल शर्तें अतिरिक्त दंड या फ्री हिट का तरीका स्पष्ट करती हैं। फ्री हिट में बल्लेबाज सामान्यतः बोल्ड, कैच, स्टंपिंग या सामान्य रन आउट से आउट नहीं होता, हालांकि रन आउट और कुछ अन्य परिस्थितियां अभी भी लागू हो सकती हैं। यहां प्रसारण ग्राफिक्स को अंतिम कानून समझना गलती है।

वाइड गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बाहर जाती है और कम से कम एक अतिरिक्त रन देती है। यदि गेंद सीमा तक चली जाए तो वाइड के साथ अतिरिक्त रन भी जुड़ सकते हैं। गेंद की ऊंचाई और दिशा का मूल्यांकन अंपायर करता है, इसलिए हर बाहर जाती गेंद वाइड नहीं होती। बल्लेबाज अगर जानबूझकर बहुत दूर हट जाए, तो निर्णय केवल दृश्य दूरी से नहीं किया जाता।

2. विकेट कैसे गिरता है?

क्रिकेट में बल्लेबाज कई तरीकों से आउट हो सकता है, लेकिन सभी तरीकों की संभावना समान नहीं होती। सबसे सामान्य तरीके बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू और रन आउट हैं। नियम पुस्तिका में हिट विकेट, स्टंपिंग, रिटायर्ड आउट, ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड और टाइम्ड आउट जैसे तरीके भी शामिल हैं।

  • बोल्ड: वैध गेंद विकेटों से टकराकर बेल गिरा दे।
  • कैच: बल्ले से लगी गेंद जमीन छूने से पहले क्षेत्ररक्षक पकड़ ले।
  • एलबीडब्ल्यू: गेंद विकेट की दिशा में हो और पैर या शरीर का संपर्क आवश्यक शर्तों के अनुसार हो।
  • रन आउट: बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो और गेंद से विकेट गिरा दिया जाए।
  • स्टंपिंग: विकेटकीपर गेंद पकड़कर क्रीज से बाहर बल्लेबाज का विकेट गिराए।
  • हिट विकेट: बल्लेबाज अपने बल्ले या शरीर से विकेट गिरा दे।
  • टाइम्ड आउट: नया बल्लेबाज तय समय में मैदान पर तैयार न हो।

एलबीडब्ल्यू में गेंद का पिच होना, विकेट की लाइन, बल्ले से पहले संपर्क और बल्लेबाज का शॉट खेलने का प्रयास महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसीलिए केवल गेंद पैर पर लगी देखकर एलबीडब्ल्यू समझ लेना गलत है। कैच में गेंद का नियंत्रण और जमीन से संपर्क भी जांचा जाता है; आधुनिक क्रिकेट में तीसरा अंपायर धीमी गति और अलग कोणों से यही बातें देखता है।

3. लक्ष्य, रन रेट और जीत

पहली पारी में 250 रन बनाने वाली टीम के सामने दूसरी टीम को जीतने के लिए 251 रन चाहिए। सीमित ओवर मैच में दूसरी टीम लक्ष्य पूरा करते ही जीत जाती है; उसके सभी ओवर खत्म होना जरूरी नहीं। यदि वह 250 पर रुकती है, तो मुकाबला बराबरी पर समाप्त हो सकता है, और प्रतियोगिता के नियम सुपर ओवर या अन्य टाई-ब्रेक प्रक्रिया बता सकते हैं।

रन रेट निकालने का सामान्य तरीका रन को खेले गए ओवरों से विभाजित करना है। 120 रन 20 ओवर में बने तो रन रेट 6.00 होगा। लक्ष्य का दबाव समझने के लिए आवश्यक रन रेट देखा जाता है: यदि 60 गेंदों में 90 रन चाहिए, तो 9.00 प्रति ओवर चाहिए। डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति वर्षा से बाधित सीमित ओवर मैचों में लक्ष्य बदलने के लिए इस्तेमाल होती है; यह साधारण रन रेट से अलग गणना है।

इलेक्ट्रॉनिक क्रिकेट स्कोरबोर्ड पर लक्ष्य, आवश्यक रन रेट और गिरते विकेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित

रन रेट और वर्षा-प्रभावित मैचों की सरल व्याख्या

आईसीसी की खेल शर्तों में न्यूनतम ओवर, रुकावट और संशोधित लक्ष्य के अलग प्रावधान हो सकते हैं। इसलिए 20 ओवर का मैच हमेशा 20-20 ओवर में समाप्त हो, यह जरूरी नहीं। बारिश, खराब रोशनी, चोट या मैदान की सुरक्षा के कारण अंपायर खेल रोक सकते हैं। आंकड़ों के मामले में आधिकारिक स्कोरर का रिकॉर्ड निर्णायक होता है, सोशल मीडिया की त्वरित पोस्ट नहीं।

यहां एक जरूरी व्यावहारिक बात है: गेंदबाज की गलती और बल्लेबाज के रन एक ही खाते में नहीं जाते। नो-बॉल तथा वाइड अतिरिक्त रनों में जाते हैं, जबकि चौका बल्ले से आया हो तो बल्लेबाज के खाते में जुड़ता है। लेग-बाय और बाय टीम के स्कोर में जुड़ते हैं, बल्लेबाज के निजी रन में नहीं। इस अंतर को नहीं समझेंगे तो बल्लेबाज के 48 और टीम के 52 रन देखकर भी भ्रमित रहेंगे।

अब खिलाड़ी की भूमिका, ओवर की गणना और लक्ष्य की बारीकियों को एक जगह देखना उपयोगी रहेगा।

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किन अपवादों और छिपी शर्तों पर ध्यान दें?

क्रिकेट में सबसे ज्यादा भ्रम उन घटनाओं से पैदा होता है जो सामान्य गेंदों जैसी दिखती हैं, पर नियम अलग लागू होता है। नो-बॉल पर विकेट गिरने के बाद भी बल्लेबाज का आउट होना हर बार रद्द नहीं होता; उदाहरण के लिए रन आउट या कुछ अन्य तरीके लागू रह सकते हैं। इसी तरह कैच पूरा होने से पहले गेंद जमीन को छू ले तो कैच मान्य नहीं होगा, चाहे क्षेत्ररक्षक ने गेंद को लगभग पकड़ ही लिया हो।

डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली भी असीमित अपील व्यवस्था नहीं है। टीमों को समीक्षा की संख्या प्रारूप और प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार मिलती है। मैदानी अंपायर का फैसला चुनौती देने पर तीसरा अंपायर उपलब्ध तकनीक, गेंद-ट्रैकिंग और अल्ट्राएज जैसी प्रणालियों से जांच करता है। “अंपायर का हर फैसला स्वतः गलत नहीं होता” — आईसीसी की समीक्षा प्रक्रिया का मूल उद्देश्य स्पष्ट त्रुटि सुधारना है, हर करीबी घटना को उलटना नहीं।

एलबीडब्ल्यू समीक्षा में गेंद के पिचिंग क्षेत्र, इम्पैक्ट स्थान और विकेट से टकराने की भविष्यवाणी देखी जाती है। यदि तकनीकी परिणाम निर्णायक न हो, तो अंपायर का मूल फैसला बच सकता है। इसे दर्शक अक्सर “अंपायर्स कॉल” कहते हैं। यह तकनीकी असफलता नहीं, समीक्षा प्रणाली में प्रमाण की सीमा का हिस्सा है। प्रसारण पर दिखाई गई लाल, पीली या हरी रेखा को समझे बिना बहस करना थोड़ा बेकार है।

खेल की भावना से जुड़े नियम भी महत्वपूर्ण हैं। गेंद को चमकाने के लिए वैध तरीके स्वीकार्य हो सकते हैं, लेकिन गेंद की स्थिति बदलने की कोशिश दंडनीय हो सकती है। क्षेत्ररक्षक की अनुचित हरकत, समय बर्बाद करना, नकली क्षेत्ररक्षण या बल्लेबाज को विचलित करने का प्रयास अंपायर की कार्रवाई ला सकता है। 2017 के क्रिकेट कानूनों और बाद के संशोधनों के लिए एमसीसी का आधिकारिक कानून संग्रह सबसे भरोसेमंद संदर्भ है।

मैच के अलग प्रारूपों में ये अपवाद याद रखें:

  • टेस्ट मैच में फॉलो-ऑन और घोषित पारी जैसे नियम लागू हो सकते हैं।
  • एकदिवसीय मैच में प्रति टीम सामान्यतः 50 ओवर होते हैं।
  • टी20 मैच में प्रति टीम सामान्यतः 20 ओवर होते हैं।
  • पावरप्ले में क्षेत्ररक्षकों की स्थिति पर सीमाएं रहती हैं।
  • बारिश के बाद लक्ष्य डकवर्थ-लुईस-स्टर्न गणना से बदल सकता है।
  • टाई होने पर सुपर ओवर या प्रतियोगिता-विशिष्ट नियम लागू हो सकते हैं।
  • ओवर-रेट धीमा होने पर कप्तान या टीम पर दंड लगाया जा सकता है।

तीसरा अंपायर वीडियो स्क्रीन पर एलबीडब्ल्यू समीक्षा देखता हुआ, नियंत्रण कक्ष में गंभीर माहौल

कप्तान की रणनीति को समझने के लिए केवल चौके और विकेट मत गिनिए। फील्ड प्लेसमेंट, गेंदबाज का स्पेल, बल्लेबाज का स्ट्राइक रेट, साझेदारी और आवश्यक रन रेट साथ देखकर निर्णय का कारण समझ आता है। उदाहरण के लिए रोहित शर्मा जैसे आक्रामक सलामी बल्लेबाज के सामने स्लिप हटाकर गहरे क्षेत्ररक्षक लगाना रन रोक सकता है, पर कैच का अवसर भी कम कर सकता है। विराट कोहली की पारी हो या बाबर आजम की, स्कोर अकेला पूरी कहानी नहीं बताता।

बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति समझने की उन्नत मार्गदर्शिका

एक विशेष किनारा जिसे नए दर्शक भूल जाते हैं, वह है “डेड बॉल”। गेंद खेल में न रहने पर उस पर रन या विकेट की सामान्य कार्रवाई नहीं चलती। अंपायर चोट, खिलाड़ी की बाधा, गेंद का टूटना या असामान्य रुकावट जैसी स्थितियों में गेंद को डेड घोषित कर सकता है। वहीं “मांकडिंग” या नॉन-स्ट्राइकर को रन आउट करना कानून के दायरे में हो सकता है, लेकिन घटना की सटीक स्थिति और गेंदबाज की डिलीवरी महत्वपूर्ण होती है। नाम पर बहस छोड़िए, रेखा और गेंद की स्थिति देखिए।

निष्कर्ष: क्रिकेट समझने का सबसे छोटा रास्ता क्या है?

क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझने का सबसे अच्छा तरीका हर गेंद को चार हिस्सों में पढ़ना है: गेंद वैध थी या नहीं, कितने रन मिले, विकेट गिरा या नहीं, और अगली गेंद पर स्थिति क्या बनी। पहले टी20 मैचों से शुरुआत करें, क्योंकि 20 ओवर की पारी में परिणाम जल्दी दिखाई देता है; फिर एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट की ओर बढ़ें। आईपीएल समाचार पर मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े और रणनीति पढ़ते समय स्कोरकार्ड के साथ यह चार-चरणीय तरीका अपनाइए।

याद रखने योग्य अंतिम सूची:

  1. छह वैध गेंदें एक ओवर बनाती हैं।
  2. नो-बॉल और वाइड ओवर की वैध गेंदों में नहीं गिने जाते।
  3. चौका और छक्का बल्लेबाज के रन में जुड़ते हैं।
  4. बाय और लेग-बाय टीम के अतिरिक्त रन होते हैं।
  5. लक्ष्य पहली पारी के स्कोर से एक रन अधिक होता है।
  6. डीआरएस केवल उपलब्ध समीक्षा और तकनीकी प्रमाण की सीमा में काम करता है।
  7. प्रारूप बदलने पर ओवर, पावरप्ले और टाई-ब्रेक नियम बदल सकते हैं।

मैच देखते समय नियम पुस्तिका खोलकर हर निर्णय को चुनौती देने की जरूरत नहीं है। पहले सामान्य ढांचा पकड़िए, फिर अपवाद सीखिए; यही व्यावहारिक क्रम है और इससे कमेंट्री भी अचानक समझ आने लगती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में ओवर क्या होता है?

उत्तर: एक ओवर छह वैध गेंदों का समूह होता है। नो-बॉल और वाइड पर रन मिलने के बावजूद वे छह वैध गेंदों की गिनती में शामिल नहीं होते। इसलिए किसी ओवर में छह से अधिक गेंदें फेंकी जा सकती हैं। ओवर पूरा होने के बाद गेंदबाजी का छोर बदलता है और अगला ओवर दूसरा गेंदबाज डालता है।

प्रश्न: क्रिकेट मैच में रन कैसे बनाए जाते हैं?

उत्तर: रन दौड़कर, चौका लगाकर, छक्का लगाकर या अतिरिक्त रन के रूप में बनाए जाते हैं। बल्लेबाज दोनों क्रीज के बीच एक पूरा बदलाव करके एक रन ले सकते हैं, जबकि जमीन से सीमा पार गेंद पर चार और हवा में सीमा पार गेंद पर छह रन मिलते हैं। बाय, लेग-बाय, नो-बॉल और वाइड टीम के अतिरिक्त रन में जुड़ते हैं।

प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?

उत्तर: नो-बॉल मुख्यतः गेंदबाज की अवैध डिलीवरी है, जबकि वाइड बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बहुत बाहर फेंकी गई गेंद है। दोनों पर सामान्यतः एक अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती। नो-बॉल पर प्रारूप के अनुसार फ्री हिट मिल सकती है, जबकि वाइड पर ऐसा नहीं होता।

प्रश्न: एलबीडब्ल्यू आउट कैसे दिया जाता है?

उत्तर: एलबीडब्ल्यू तब दिया जा सकता है जब गेंद बल्लेबाज के पैर या शरीर से टकराकर विकेट को लगती, और पिचिंग, इम्पैक्ट तथा शॉट खेलने जैसी आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं। गेंद बल्ले से पहले लगी या नहीं, गेंद विकेट की लाइन में थी या नहीं और बल्लेबाज ने शॉट का प्रयास किया था या नहीं, ये बातें निर्णायक होती हैं। डीआरएस में गेंद-ट्रैकिंग इन बिंदुओं की जांच में मदद करती है।

प्रश्न: डीआरएस काम न करे या फैसला अस्पष्ट हो तो क्या होता है?

उत्तर: तकनीकी प्रमाण निर्णायक न होने पर मैदानी अंपायर का मूल फैसला बरकरार रह सकता है। टीम को समीक्षा की सीमित संख्या मिलती है, जो टी20, एकदिवसीय या टेस्ट प्रतियोगिता के नियमों पर निर्भर करती है। एलबीडब्ल्यू में “अंपायर्स कॉल” का अर्थ है कि उपलब्ध प्रमाण अंपायर के मूल निर्णय को बदलने के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं था।

प्रश्न: टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में क्या अंतर है?

उत्तर: टेस्ट क्रिकेट अधिकतम पांच दिन चल सकता है, एकदिवसीय क्रिकेट में सामान्यतः प्रति टीम 50 ओवर और टी20 में प्रति टीम 20 ओवर होते हैं। टेस्ट में दो पारियां और घोषित पारी जैसी रणनीतियां महत्वपूर्ण हैं, जबकि सीमित ओवर क्रिकेट में लक्ष्य, रन रेट और पावरप्ले अधिक निर्णायक होते हैं। बारिश और टाई की स्थिति में तीनों प्रारूपों की खेल शर्तें अलग हो सकती हैं।

प्रश्न: क्रिकेट सीखने के लिए शुरुआती दर्शक को क्या देखना चाहिए?

उत्तर: शुरुआत में स्कोर, गिरते विकेट, वैध गेंदों की संख्या और आवश्यक रन रेट पर ध्यान देना चाहिए। पहले टी20 मैचों में हर गेंद का परिणाम नोट करें, फिर एकदिवसीय मुकाबलों में पावरप्ले और लक्ष्य गणना समझें। उसके बाद टेस्ट क्रिकेट में सत्र, साझेदारी, फॉलो-ऑन और घोषित पारी जैसे नियम जोड़ें; यही सबसे कम उलझाने वाला क्रम है।

क्रिकेट के नियमों को पढ़ने के साथ किसी आधिकारिक स्कोरकार्ड को सामने रखकर अभ्यास करें। यही काम किताबों की लंबी परिभाषाओं से कहीं जल्दी समझ आता है।

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पढ़ने के लिए धन्यवाद।

उन लोगों के लिए जो केवल रोमांच के लिए नहीं खेलते।

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IPL समाचार · The High-Stakes Editorial · No. 01

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